महर्षि मार्कंडेय तपोस्थली-बिलासपुर (हि.प्र.)

By | January 12, 2018

महर्षि मार्कंडेय तपोस्थली-बिलासपुर (हि.प्र.): बिलासपुर क्षेत्र हिमाचल प्रदेश में स्थित बारह जिलों में से एक है! पहले इसे कहलूर के नाम से भी जाना जाता था! युगों से बिलासपुर की यह पवित्र भूमि ऋषि-मुनियों की तपोस्थली भी रही है! इन महान तपस्वियों में से एक हैं महर्षि मार्कंडेय! आज के इस लेख के माध्यम से मैं आपको महर्षि मार्कंडेय की तपोस्थली लेकर जा रहा हूँ! आशा है आपको आनंद आएगा!

यह स्थान ज़िला बिलासपुर से लगभग 20 कि.मी. की दूरी पर पंचायत मकरी-मार्कंड में स्थित है जो घागस-ब्रह्म्पुखर-शिमला राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ता है और मुख्य मार्ग से 2.5 कि.मी. की दूरी पर एक पक्के संपर्क-मार्ग से जुड़ा हुआ है! वनोछादित शिवालिक पर्वत श्रंखला की गोद में स्थित यह तपोस्थली अपनी अलौकिकता से अंतर्मन को असीम आनंद और शान्ति का आभास कराती है!

महर्षि मार्कंडेय तपोस्थली-बिलासपुर (हि.प्र.)

पौराणिक इतिहास :

पौराणिक कथा के अनुसार ऋषि मृकंडू की कोई संतान नहीं थी और उन्होंने संतान प्राप्ति हेतु भगवान् शिव को अपने तप से प्रसन्न किया।  परिणामस्वरुप, भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद के रूप में एक गुणवान पुत्र दिया,  लेकिन साथ  में यह चेतावनी भी  दी कि यह बालक अल्पायु होगा और केवल सोलह साल की आयु तक ही जीवित रहेगा।

महर्षि मार्कंडेय

तदोपरांत ऋषि मृकंडू अपने पुत्र की अल्पायु और मृत्यु के भय में ही चिन्तित रहने लगे! जब उनके पुत्र को अपने पिता की चिंता के बारे में पता चला तो उन्होंने तप के माध्यम से भगवान् शिव को प्रसन्न करने का दृढ निश्चिय किया! बालक मार्कंडेय की आयु सीमा के समीप ही भगवान् शिव ने उनके कठोर तप से प्रसन्न होकर उनको दीर्घायु होने का आशीर्वाद दिया और तभी से यह स्थान आस्था का केंद्र है! एक अन्य पौराणिक मान्यता के अनुसार बैसाखी के दिन इस स्थान पर एक जल-स्त्रोत प्रकट हुआ और कहते हैं कि इस जल से स्नान करने पर संतानहीन माताओं-बहनों को संतान-प्राप्ति होती है! इस जल को चर्म-रोगों व अन्य व्याधियों से निदान हेतु भी हितकारी माना जाता है! ऐसी भी मान्यता है कि इस स्थान पर चार धाम यात्रा के अंतिम पड़ाव के तौर पर आशीर्वाद लेने व इस जल-स्त्रोत में नहाने से चार धाम यात्रा का पूर्ण-फल प्राप्त होता है!

महर्षि मार्कंडेय तपोस्थली-बिलासपुर (हि.प्र.)

महर्षि मार्कंडेय की तपोस्थली कैसे पहुंचे:

गूगल नक्शा लिंक:            https://goo.gl/maps/FhiRjPUsBkK2

हवाई मार्ग:                  भुंतर हवाई अड्डा (121 कि.मी.), चंडीगढ़ हवाई अड्डा (149 कि.मी.)

बस/अन्य वाहन:              चंडीगढ़ (149 कि.मी.), शिमला (82 कि.मी.), धर्मशाला (161 कि.मी.)

मन्दिर-परिसर

इस तपोस्थली में दर्शन करने हेतु श्रद्धालु और पर्यटक पूरे वर्ष यहाँ आते हैं और विशेषतय: बैसाखी पर यहाँ धूम-धाम से उत्सव भी मनाया जाता है! अगर पर्यटन की दृष्टि से देखा जाए तो बिलासपुर क्षेत्र में शीत ऋतू के आसपास (अक्टूबर-नवम्बर, जनवरी-मार्च) आना सबसे उत्तम है और आप इस स्थल के साथ-साथ सुहावने मौसम में अन्य स्थलों (कोल डैम, भाखड़ा डैम, गोबिंद सागर झील, बंदला धार, नौकायन इत्यादि) का भी आनंद ले सकते हैं!

इसके साथ-साथ स्थानीय भोजन पसंद करने वाले पाठकों को बताना चाहूँगा कि घागस से बिलासपुर की तरफ़ जाते हुए लगभग 1 कि.मी. की दूरी पर आपको बागी-बनोला नामक स्थान पर बाईं तरफ़ एक बहादुर ढाबा मिलेगा, जहाँ आप मक्की की रोटी, माह की दाल, देशी घी और कढ़ी का आनंद ले सकते हैं और वो भी सिर्फ़ 70-80 रूपए में! 🙂

महर्षि मार्कंडेय तपोस्थली-बिलासपुर (हि.प्र.)

पर्यटन की संभावनाएं:

शिवालिक पर्वत श्रंखला की गोद में बसी महर्षि मार्कंडेय की यह तपोस्थली पुरानत-काल से ही आस्था का केंद्र रही है! बिलासपुर क्षेत्र के मुख्य पर्यटक स्थलों में से एक इस स्थान को मैं धार्मिक-पर्यटन की श्रेणी में रखना चाहूँगा!

अधोसरंचना विकास

अभी हाल ही में हिमाचल प्रदेश में पर्यटन विभाग हि. प्र. द्वारा एशियन डेवलपमेंट बैंक के सहयोग से आई. डी.आई.पी.टी./ हि.प्र. इकाई के अंतर्गत समुदाय आधारित पर्यटन परियोजना के अन्तर्गत इस स्थान को सम्मिलित किया गया है, जिसमें अधोसरंचना विकास जैसे कि पर्यटक स्थलों के नवीनीकरण, पार्क/उद्यानों के नवीनीकरण, विश्राम गृह का निर्माण, पार्किंग क्षेत्र और अन्य पर्यटन संबंधी स्थलों का निर्माण / नवीनीकरण हेतु कार्य प्रगति पर हैं| साथ ही साथ इस क्षेत्र के स्थानीय वासियों को पर्यटन की मुख्य गतिविधियों  से जोड़ने हेतु पर्यटन आधारित प्रशिक्षण भी करवाए जा रहे हैं!

उपसंहार:

मैं आशा करता हूँ कि इस तपोस्थली में समुदाय आधारित पर्यटन के सतत विकास हेतु किये जा रहे ये प्रयास सफल हों और यह स्थान धार्मिक-पर्यटन के साथ-साथ इस क्षेत्र की संस्कृति, स्थानीय भोजन व हस्त-शिल्प उत्पादों से यहाँ आने वाले श्रधालुओं व पर्यटकों को आकर्षित करे! इस प्रयास में प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से प्रयत्नशील सभी जनों को मेरी शुभकामनाएं!

महर्षि मार्कंडेय तपोस्थली-बिलासपुर (हि.प्र.)

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