तीर्थन घाटी में पर्यटन विकास की ओर अग्रसर एक गाँव गुशैनी

By | January 9, 2018

तीर्थन घाटी में पर्यटन विकास की ओर अग्रसर एक गाँव गुशैनी! प्रिय मित्रों! यूं तो हिमाचल प्रदेश को देव भूमि का दर्ज़ा प्राप्त है और निश्चित रूप से ही यहाँ का हर एक क्षेत्र अपने आप में बहुत सारी विशेषताएं समेटे हुए है! जब हम हिमाचल में पर्यटन स्थलों की बात करते हैं तो हमारे ज़हन में मुख्यत: शिमला, कुल्लू, मनाली, धर्मशाला, डलहौज़ी इत्यादि जैसे स्थान आते हैं! निश्चित रूप से ये स्थान ऐतिहासिक महत्व के साथ-साथ अपने प्राकृतिक सौन्दर्य से यहाँ आने वाले हर व्यक्ति का मन मोह लेते हैं, किन्तु गत वर्षों में पर्यटन का एक और स्वरुप सामने आया है, जिसमें पर्यटन विकास की नई संभावनाएं निकल कर सामने आई है!

पर्यावर्णीय पर्यटन की बात करें तो विशेषतय: प्रकृति प्रेमियों और साहसिक खेलों/ कार्यों में रुचि रखने वाले इस विशेष पर्यटन वर्ग को इस क्षेत्र ने आकर्षित किया है, जो पर्यटन-विकास में अपना एक अहम योगदान दे रहा है!

तीर्थन घाटी में पर्यटन विकास की ओर अग्रसर एक गाँव गुशैनी!

गुशैनी गाँव

इसी पहल में आज बात करेंगे गुशैनी गाँव की जो हिमाचल प्रदेश में ज़िला कुल्लू की तीर्थन घाटी में स्थित है! यह स्थान तीर्थन नदी के पास बसा हुआ है और ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क (जिसे यूनेस्को ने वैश्विक धरोहर का अलंकरण दिया है) का प्रवेश द्वार भी है! यह स्थान वनोच्छादित है अपने इस स्वरुप से सभी को मन्त्र-मुग्ध कर देता है! गाँव में काष्ठ-कला के द्वारा बनाए गये लकड़ी के घर इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को प्रदर्शित करते हैं और पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र हैं!

गुशैनी तीर्थन घाटी में ट्रैकिंग के लिए प्रवेश द्वार है और बंजार से 10 कि. मी. दूरी पर है| गुशैनी ‘ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क’ के प्रवेश से लगभग 10 कि.मी. पहले है और पार्क के लिए जाने वाले सबसे उत्साही पर्यटकों के लिए रहने का पसंदीदा स्थान है| तीर्थन और फ्लाचन नदी का संगम देखने का एक दर्शनीय स्थल गुशैनी  के करीब है! एक और यहाँ की विशेषता जो पर्यटकों को आकर्षित है, और वो है यहाँ पर पायी जाने वाली ट्राउट मछली! इस मछली को बहुत से पर्यटक आहार के रूप में पसंद करते हैं!

काष्ठ-कला से बना  पारम्परिक घर

इस स्थान पर पर्यटकों के ठहरने हेतु बहुत से होम-स्टे, गेस्ट हाउस, कैम्पिंग-साइट्स और रिसोर्ट भी उपलब्ध हैं! समीप ही साईं-रोपा में वन्य-जीवन विभाग, हि.प्र. सरकार का एक प्रशिक्षण केंद्र भी है जहाँ सम्बंधित विभाग में बुकिंग करवाने पर कमरों और डोर्मेटरी में ठहरा जा सकता है!

तीर्थन घाटी में पर्यटन विकास की ओर अग्रसर एक गाँव गुशैनी!

 

गुशैनी कैसे पहुंचे:

गूगल नक्शा लिंक:            https://goo.gl/maps/cL2dWhQKXPM2

हवाई मार्ग:                 

भुंतर हवाई अड्डा (51 कि.मी.), चंडीगढ़ हवाई अड्डा (270 कि.मी.)

बस/अन्य वाहन:             

चंडीगढ़ (270 कि.मी.), शिमला (205 कि.मी.), धर्मशाला (192 कि.मी.)

काली धार

वन्य-सम्पदा

 

 

 

 

 

 

 

वैसे तो पर्यटक यहाँ पूरा साल आते हैं, लेकिन गर्मियों का मौसम पर्यटन के लिए उत्तम है!

मुख्य उत्पाद/ सेवाएँ:

गुशैनी में साह्सकी खेलों में रेपलिंग (रस्सी के सहारे चढ़ाई), रिवर क्रासिंग (नदी पार करना) और ट्रैकिंग जैसी गतिविधियाँ प्रमुख हैं, जो यहाँ आने वाले पर्यटकों में आकर्षण का विशेष केंद्र है! यहाँ पर स्थानीय स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाये गये पूर्णतय: जैविक (organic) उत्पादों को भी पर्यटक बहुत पसंद करते हैं!

अभी हाल ही में पर्यटन विभाग द्वारा इस पंचायत को समुदाय आधारित पर्यटन परियोजना के अन्तर्गत लिया गया है जिससे आम समुदाय को प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से पर्यटन की मूल्य-श्रंखला से जोड़ा जाएगा, जिससे आर्थिक व सामाजिक रूप से उनका सुद्रिधिकरण हो सके!

 

तीर्थन घाटी में पर्यटन विकास की ओर अग्रसर एक गाँव गुशैनी!

उपसंहार:

मुझे याद है कि आज से लगभग 6 साल पहले एक कार्यालय के कार्य से मुझे यहाँ पहली बार आने का सौभाग्य मिला था! मेरे 3 दिन के पड़ाव में जो प्यार मुझे इस क्षेत्र के लोगों से मिला और प्रकति से जो जुड़ाव मैंने यहाँ महसूस किया, वो चिर-स्मरणीय रहेगा!

मैं धन्यवाद देना चाहूँगा अनुज जय गोपाल शर्मा का, मुझे इस क्षेत्र के नये छाया-चित्र देने हेतु! श्री ज्ञान चंद व परिवार (उस समय त्रिशला होम-स्टे चलाते थे) का आभार, आपके आथित्य ने मुझे इस क्षेत्र के जन समुदाय को नज़दीक से देखने-समझने का अवसर दिया!

अंत में यही कहना चाहूँगा कि इस जिला में कुल्लू, मनाली और मणिकर्ण जैसे मुख्य पर्यटक स्थल होते हुए भी इस क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन के पटल पर लाना एक बहुत बड़ी चुनौती रही है, लेकिन यहाँ के जन समुदाय ने जो प्रयास पिछले 20 सालों में किया है, वो अत्यंत सराहनीय है! तीर्थन नदी पर किसी भी पन विद्युत् परियोजना का निर्माण न हो, इसके लिए जन समुदाय ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी! निश्चित रूप से इस जन समुदाय को प्राकृतिक पर्यटन में छेड़-छाड़ से नुक्सान की समझ थी और यही एक  मुख्य कारण रहा है कि पर्यटन सम्बन्धी गतिविधियों में जुड़े हुए स्थानीय लोग पर्यटकों को सदैव अपनी बेहतर सेवाएँ देने का प्रयास करते हैं!

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2 thoughts on “तीर्थन घाटी में पर्यटन विकास की ओर अग्रसर एक गाँव गुशैनी

  1. राकेश गौतम

    मुझे तीर्थंन घाटी में पर्यटन विकास की और से जाने का मौका मिला तथ यहाँ के लोगों का प्यार तथा यहाँ का मनमोहक दृश्य देख कर खुशी हुई तथा मैं सोच रहा हूँकि वर्ष में एक बार यहान अपने परिवार के साथ जरूर जाऊं ! अमित का यह्प्र्यास बहुत अच्छा है तथा शीघ्र ही गोशैनी गाँव तथा तीर्थं घाटी में पर्यटक जरूर घोमने जायेंगे !
    राकेश गौतंम
    श्री नयना देवी जी

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